
हालिया अंतरराष्ट्रीय युद्ध के चलते कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। इससे उद्योगपतियों और आयातकों का मुनाफा कम हुआ है और उत्पादन लागत बढ़ गई है। विशेषकर ऐसे व्यवसाय जिन्हें विदेश से सामग्री मंगवानी पड़ती है, उनकी आयात लागत बढ़कर भारी पड़ गई है।
व्यापारियों ने सरकार से आग्रह किया है कि वे राहत पैकेज या किसी तरह की वित्तीय मदद प्रदान करें, ताकि उद्योगों पर महंगाई और बढ़ी लागत का असर कम हो सके। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार समय पर कदम नहीं उठाती, तो घरेलू उद्योग और निर्यात दोनों प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी हो सकती है।



