
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत ने इस पहल के जरिए करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की बड़ी बचत की है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से देश की विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम हुई है, जिससे न केवल आर्थिक लाभ हुआ है बल्कि ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत हुई है। भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित तेल पर निर्भर रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता था। ऐसे में इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम एक गेम-चेंजर के रूप में उभरा है।
इथेनॉल, जो मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य जैविक स्रोतों से बनाया जाता है, एक स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन है। जब इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है, तो यह न केवल प्रदूषण को कम करता है बल्कि विदेशी मुद्रा की बचत भी करता है। सरकार ने 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य तय किया है, जिसे समय से पहले हासिल करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस पहल से किसानों को भी बड़ा फायदा मिला है, क्योंकि इथेनॉल उत्पादन के लिए कृषि उत्पादों की मांग बढ़ी है, जिससे उनकी आय में इजाफा हुआ है।
इसके अलावा, इथेनॉल मिश्रण से कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किए हैं, उन्हें हासिल करने में यह पहल अहम भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह एक मजबूत कदम है, जो देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रहा है।
सरकार ने इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई नीतिगत सुधार भी किए हैं, जिनमें डिस्टिलरी लगाने में आसानी, वित्तीय सहायता और खरीद की गारंटी शामिल है। इससे निजी निवेश भी बढ़ा है और देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर, इथेनॉल ब्लेंडिंग न केवल आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद साबित हुई है, बल्कि यह पर्यावरण और किसानों के लिए भी लाभकारी है, जिससे भारत एक सतत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।



