
उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। राजधानी लखनऊ में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, जिससे कुल वोटरों की संख्या में गिरावट देखी गई। शुरुआती ड्राफ्ट सूची में लखनऊ के करीब 30% तक वोटर कम हो गए थे, जो राज्य में सबसे अधिक था।
हालांकि, अंतिम सूची जारी होने से पहले दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद कुछ नए नाम जोड़े गए हैं। पूरे उत्तर प्रदेश की बात करें तो फाइनल वोटर लिस्ट में करीब 13.25 करोड़ मतदाता होने का अनुमान है, जो पहले की तुलना में कम जरूर है, लेकिन ड्राफ्ट लिस्ट से थोड़ा सुधार माना जा रहा है।
चुनाव आयोग द्वारा यह पूरी प्रक्रिया मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ने के लिए की गई थी। ऐसे में साफ है कि कुल संख्या में कमी आई है, लेकिन अंतिम सूची पहले जारी ड्राफ्ट से अधिक संतुलित और संशोधित होगी।
इस बदलाव का असर आने वाले 2027 विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है, खासकर लखनऊ जैसे शहरी क्षेत्रों में जहां सबसे ज्यादा नाम हटाए गए थे। राजनीतिक दल भी अब नई वोटर लिस्ट के आधार पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।



