
कार की बैटरी धीरे-धीरे कमजोर होती है और कई बार वह अचानक काम करना बंद कर देती है, जिससे वाहन स्टार्ट होने में दिक्कत आती है। अगर समय रहते संकेतों को पहचान लिया जाए तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
सबसे आम संकेतों में इंजन का देर से स्टार्ट होना, हेडलाइट्स का हल्का या फीका पड़ना, और बार-बार इलेक्ट्रिकल फॉल्ट आना शामिल है। इसके अलावा डैशबोर्ड पर बैटरी वार्निंग लाइट का जलना भी एक गंभीर संकेत माना जाता है।
कई बार बैटरी से अजीब गंध आना या गाड़ी बंद होने के बाद दोबारा स्टार्ट न होना भी बताता है कि बैटरी अपनी लाइफ पूरी कर चुकी है। ऐसे में देरी करने के बजाय तुरंत बैटरी की जांच कराना बेहतर होता है, ताकि रास्ते में अचानक परेशानी न हो।
कई बार लोग इन शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे अचानक लंबी यात्रा या इमरजेंसी में गाड़ी स्टार्ट नहीं हो पाती। विशेषज्ञों के अनुसार, बैटरी की उम्र आमतौर पर 2 से 4 साल के बीच होती है, लेकिन इस्तेमाल और मौसम के अनुसार इसमें फर्क पड़ सकता है।
अगर कार लंबे समय तक खड़ी रहती है या बार-बार छोटे-छोटे ट्रिप्स किए जाते हैं, तो बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने लगती है। ऐसे में समय-समय पर वोल्टेज और चार्जिंग सिस्टम की जांच कराना जरूरी होता है।
साथ ही, टर्मिनल पर जंग लगना या ढीला कनेक्शन भी बैटरी की परफॉर्मेंस को प्रभावित कर सकता है। इसलिए नियमित सर्विसिंग के दौरान बैटरी की स्थिति जरूर चेक करानी चाहिए, ताकि अचानक खराबी से बचा जा सके।



