धर्म-आस्था
मंदिर में जूते-चप्पल क्यों उतारते हैं? जानें धार्मिक कारण


मंदिर में प्रवेश करने से पहले जूते-चप्पल उतारने की परंपरा भारत में सदियों से चली आ रही है। इसे केवल एक नियम नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है।
मान्यता है कि मंदिर एक पवित्र स्थान होता है, जहां सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। ऐसे में बाहर के जूते-चप्पलों के साथ प्रवेश करने को अनुचित माना जाता है, क्योंकि उन्हें अपवित्रता और बाहरी नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है।
इसके अलावा, यह परंपरा स्वच्छता और अनुशासन से भी जुड़ी है। जूते उतारकर मंदिर में प्रवेश करना श्रद्धा, विनम्रता और भगवान के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि आज भी हर मंदिर में इस परंपरा का पालन किया जाता है।