
भारतीय मुद्रा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां रुपया 35 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.63 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस गिरावट ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है।
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी का असर न सिर्फ विदेशी मुद्रा बाजार पर, बल्कि शेयर बाजार और आयात-निर्यात से जुड़े सेक्टरों पर भी देखा गया है। आयातित वस्तुएं महंगी होने की आशंका के बीच महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेश का प्रवाह मुद्रा की चाल को प्रभावित कर रहे हैं। फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।



