मकर संक्रांति जनवरी में ही क्यों आती है, जबकि होली की तारीख हर साल बदलती है? जानिए कारण

भारतीय परंपरा में मनाए जाने वाले अधिकांश त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार निर्धारित होते हैं, लेकिन सभी त्योहारों की गणना एक ही आधार पर नहीं की जाती। यही कारण है कि मकर संक्रांति और होली जैसे प्रमुख पर्वों की तिथियों में अंतर देखने को मिलता है। जहां मकर संक्रांति लगभग हर वर्ष जनवरी के मध्य में आती है, वहीं होली की तारीख हर साल बदल जाती है।
मकर संक्रांति का निर्धारण सूर्य की गति के आधार पर किया जाता है। यह पर्व उस समय मनाया जाता है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। चूंकि सूर्य की यह खगोलीय स्थिति ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार लगभग निश्चित समय पर आती है, इसलिए मकर संक्रांति सामान्यतः 14 या 15 जनवरी को ही पड़ती है। इसे सौर (Solar) गणना पर आधारित पर्व माना जाता है।
इसके विपरीत होली का निर्धारण चंद्रमा की स्थिति के आधार पर किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन और उसके अगले दिन रंगों की होली मनाई जाती है। चूंकि चंद्र मास की अवधि ग्रेगोरियन कैलेंडर के महीनों से पूरी तरह मेल नहीं खाती, इसलिए होली की तारीख हर वर्ष बदलती रहती है। यह चंद्र (Lunar) गणना पर आधारित पर्व है।
सरल शब्दों में कहें तो मकर संक्रांति सूर्य आधारित त्योहार है, जबकि होली चंद्र आधारित पर्व है। यही वजह है कि मकर संक्रांति की तारीख लगभग स्थिर रहती है, जबकि होली और कई अन्य हिंदू त्योहार हर साल अलग-अलग तिथियों पर मनाए जाते हैं। हिंदू कैलेंडर की यही विशेषता उसे सौर और चंद्र दोनों खगोलीय गणनाओं से जोड़ती है, जो भारतीय समय-गणना की प्राचीन परंपरा को दर्शाती है।



