LNG महंगी होने के संकेत, एशिया-यूरोप की बढ़ती मांग से भारत में बढ़ सकती है महंगाई

वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर LNG (Liquefied Natural Gas) की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। एशिया और यूरोप में प्राकृतिक गैस की मांग बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय LNG कीमतों पर दबाव बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहता है तो भारत जैसे बड़े आयातक देशों को अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
यूरोप ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए LNG आयात बढ़ा रहा है, जबकि एशियाई देशों में गर्मी और औद्योगिक गतिविधियों के कारण गैस की मांग में वृद्धि देखी जा रही है। इन दोनों क्षेत्रों की बढ़ती खरीदारी वैश्विक आपूर्ति पर दबाव डाल सकती है, जिससे स्पॉट मार्केट में कीमतें बढ़ने की आशंका है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आयातित LNG से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि का असर गैस आधारित उद्योगों, उर्वरक क्षेत्र, बिजली उत्पादन और सिटी गैस वितरण नेटवर्क पर पड़ सकता है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने की संभावना रहती है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऊर्जा लागत में वृद्धि का असर अंततः महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है। परिवहन, विनिर्माण और कई औद्योगिक क्षेत्रों की लागत बढ़ने से वस्तुओं और सेवाओं के दाम प्रभावित हो सकते हैं।
हालांकि भारत ने दीर्घकालिक LNG आपूर्ति समझौतों और ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण के माध्यम से जोखिम कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं, फिर भी वैश्विक बाजार में तेज उतार-चढ़ाव का प्रभाव पूरी तरह टाला नहीं जा सकता।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में LNG बाजार की दिशा काफी हद तक मौसम, वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और प्रमुख निर्यातक देशों की आपूर्ति क्षमता पर निर्भर करेगी। इसलिए ऊर्जा बाजार से जुड़े घटनाक्रमों पर सरकार, उद्योग और निवेशकों की नजर बनी हुई है।



