जागरण संवादी देहरादून: भारतीय ब्रांड्स ग्लोबल क्यों नहीं बन पाते? दिलीप चेरियन ने बताई बड़ी वजह

देहरादून में आयोजित जागरण संवादी कार्यक्रम में देश के जाने-माने पीआर और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन विशेषज्ञ दिलीप चेरियन ने भारतीय ब्रांड्स की वैश्विक पहचान को लेकर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा, उत्पाद और नवाचार की कोई कमी नहीं है, लेकिन कई कंपनियां अपनी कहानी दुनिया तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने में पीछे रह जाती हैं।
चेरियन के अनुसार वैश्विक स्तर पर सफल ब्रांड केवल उत्पाद नहीं बेचते, बल्कि वे एक भरोसा, पहचान और भावनात्मक जुड़ाव भी तैयार करते हैं। भारतीय कंपनियों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने के लिए ब्रांड निर्माण और संचार रणनीति पर अधिक ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि कई भारतीय कंपनियां व्यवसायिक रूप से मजबूत होने के बावजूद वैश्विक ब्रांड वैल्यू बनाने में अपेक्षित निवेश नहीं करतीं। परिणामस्वरूप उनकी पहचान सीमित बाजारों तक ही रह जाती है, जबकि विदेशी कंपनियां अपनी ब्रांड स्टोरी को वैश्विक स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
दिलीप चेरियन ने यह भी कहा कि आज के दौर में डिजिटल मीडिया, जनसंपर्क और रणनीतिक संचार किसी भी ब्रांड की सफलता के महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। केवल अच्छा उत्पाद होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सही प्रस्तुति भी उतनी ही जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत तेजी से वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। ऐसे में भारतीय कंपनियों के पास अपनी वैश्विक पहचान मजबूत करने का बड़ा अवसर मौजूद है। इसके लिए दीर्घकालिक ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता होगी।
जागरण संवादी में चेरियन के विचारों ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारतीय ब्रांड्स केवल घरेलू बाजार तक सीमित न रहकर विश्व स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकते हैं, बशर्ते वे ब्रांड निर्माण को रणनीतिक प्राथमिकता बनाएं।



