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ओमान-गुजरात गैस पाइपलाइन पर बड़ा अपडेट

ओमान से गुजरात तक समुद्र के नीचे करीब 2,000 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। लंबे समय से चर्चा में रही इस अंडरसी पाइपलाइन योजना को फिलहाल आगे बढ़ाए जाने के संकेत नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग ₹40,000 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट पर इस समय कोई सक्रिय सरकारी या व्यावसायिक योजना नहीं चल रही है।

यह परियोजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और पश्चिम एशिया से सीधे प्राकृतिक गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चर्चा में आई थी। प्रस्तावित पाइपलाइन के जरिए ओमान से प्राकृतिक गैस को सीधे गुजरात के तट तक पहुंचाने की कल्पना की गई थी। हालांकि समुद्र के भीतर इतनी लंबी पाइपलाइन बिछाने की तकनीकी चुनौतियां, लागत और व्यावसायिक व्यवहार्यता हमेशा से प्रमुख मुद्दे रहे हैं।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) बाजार के विस्तार और गैस परिवहन के वैकल्पिक साधनों की उपलब्धता के कारण ऐसी परियोजनाओं की आर्थिक उपयोगिता पर लगातार पुनर्विचार किया जाता रहा है। यही वजह है कि कई बड़े क्रॉस-बॉर्डर ऊर्जा प्रोजेक्ट शुरुआती चर्चा के बाद आगे नहीं बढ़ पाते।

भारत फिलहाल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पाइपलाइन गैस के साथ-साथ LNG आयात पर भी जोर दे रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में गैस इंफ्रास्ट्रक्चर और सिटी गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को विविध और सुरक्षित बनाया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में यदि बाजार परिस्थितियां, मांग और आर्थिक गणनाएं अनुकूल होती हैं तो इस तरह की परियोजनाओं पर फिर से विचार किया जा सकता है। लेकिन मौजूदा स्थिति में ओमान से गुजरात तक प्रस्तावित अंडरसी गैस पाइपलाइन को लेकर किसी ठोस क्रियान्वयन योजना की पुष्टि नहीं हुई है।

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