जन भवन में राज्यपाल ने किया योगाभ्यास, बोलीं- योग को बनाएं जीवन का संस्कार

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जन भवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राज्यपाल ने योगाभ्यास कर स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग केवल एक शारीरिक गतिविधि नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन दर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि योग को दैनिक जीवन का संस्कार बना लिया जाए तो स्वस्थ, सशक्त और विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
राज्यपाल ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रभावी माध्यम है। नियमित योगाभ्यास से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में विभिन्न योगासन और प्राणायाम का सामूहिक अभ्यास किया गया। योग प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को सही तरीके से योग करने की जानकारी दी और इसके स्वास्थ्य संबंधी लाभों पर प्रकाश डाला। बड़ी संख्या में लोगों ने कार्यक्रम में भाग लेकर योग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज दुनिया के अनेक देशों में लोग योग को स्वस्थ जीवनशैली के रूप में अपना रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि योग के माध्यम से भारत न केवल स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई मिसाल कायम करेगा, बल्कि एक जागरूक, ऊर्जावान और विकसित राष्ट्र के रूप में भी आगे बढ़ेगा।



