Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी व्रत कथा का पाठ दिलाएगा पुण्य, मिलेगा विशेष फल

सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से उपवास रखकर व्रत कथा का श्रवण या पाठ करता है, उसे सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत पापों का नाश करने और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करने वाला माना गया है।
पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत काल में भीमसेन को भूख अधिक लगती थी, इसलिए वे वर्षभर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे। तब महर्षि वेदव्यास ने उन्हें ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी। कहा गया कि इस एक व्रत के पालन से सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो सकता है। भीमसेन ने श्रद्धा से यह व्रत किया और उन्हें विशेष पुण्य की प्राप्ति हुई।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन जल का त्याग कर उपवास रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने, दान-पुण्य करने और व्रत कथा सुनने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। मान्यता है कि इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मृत्यु के बाद विष्णुलोक की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
इसी कारण निर्जला एकादशी पर व्रत कथा का पाठ और श्रवण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण कर धर्म, संयम और सेवा का संकल्प लेते हैं, जिससे आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।



