उत्तराखंड में युवा मतदाता बनेंगे सत्ता की चाबी, BJP-कांग्रेस ने बनाई रणनीति

उत्तराखंड की राजनीति में युवा मतदाता आने वाले समय में सत्ता की चाबी साबित हो सकते हैं। राज्य में बड़ी संख्या में युवा वोटर हैं, जिनके रुख से चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए रणनीति बनाने में जुटे हैं।
युवाओं के बीच रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वरोजगार और बेहतर अवसर जैसे मुद्दे सबसे अहम माने जाते हैं। राजनीतिक दल इन विषयों को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता देने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा जहां अपनी सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को युवाओं तक पहुंचाने पर जोर दे रही है, वहीं कांग्रेस रोजगार और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है।
उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन लंबे समय से बड़ा मुद्दा रहा है। युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर अवसर पैदा करना राजनीतिक दलों के लिए चुनौती भी है और चुनावी मुद्दा भी।
भाजपा और कांग्रेस दोनों संगठन स्तर पर युवाओं तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। युवा सम्मेलनों, सोशल मीडिया अभियानों और स्थानीय संवाद कार्यक्रमों के जरिए नए मतदाताओं को जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में युवा मतदाता केवल संख्या के लिहाज से नहीं, बल्कि मुद्दों के आधार पर भी चुनावी दिशा तय कर सकते हैं। ऐसे में आगामी चुनावों में युवाओं को साधना सभी दलों की प्राथमिकता में रहेगा।



