
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की GDP ग्रोथ को लेकर विपक्ष और आलोचकों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि एक समय भारत को दुनिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन आज देश तेज आर्थिक विकास के साथ आगे बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने 2013 के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भारत को ‘Fragile Five’ देशों में रखा गया था। उनके मुताबिक आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं और भारत दुनिया की प्रमुख तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी भारत की हालिया 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि के आंकड़े को लेकर चल रही बहस के बीच आई है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जो बाजार की उम्मीदों से अधिक रही।
GDP के आंकड़ों को लेकर आर्थिक विशेषज्ञों और विपक्ष की ओर से सवाल भी उठाए गए हैं। कुछ आलोचकों ने नई GDP गणना पद्धति, आधार वर्ष और डिफ्लेटर से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की है। वहीं सरकार ने नई पद्धति का बचाव किया है।
पीएम मोदी ने आलोचकों के रवैये को नकारात्मक सोच से जोड़ते हुए कहा कि कुछ लोग देश में हो रही सकारात्मक प्रगति को स्वीकार करने के बजाय लगातार कमियां तलाशते हैं। उन्होंने भारत की आर्थिक क्षमता और विकास की दिशा पर भरोसा जताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। उनके अनुसार, पहले जिस देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई जाती थी, वह अब वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
GDP वृद्धि के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। सरकार जहां 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को आर्थिक मजबूती का संकेत बता रही है, वहीं आलोचक आंकड़ों की गणना और उसके वास्तविक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक यात्रा में आए बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा कि देश ने मुश्किल परिस्थितियों से निकलकर अपनी क्षमता साबित की है। उन्होंने आर्थिक उपलब्धियों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण रखने पर जोर दिया।
‘Fragile Five’ का संदर्भ देते हुए पीएम मोदी ने भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति की तुलना पुराने दौर से की। उनका कहना है कि आज भारत की विकास दर और वैश्विक आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी अलग है।
GDP ग्रोथ को लेकर जारी राजनीतिक और आर्थिक बहस के बीच प्रधानमंत्री का बयान सरकार के आर्थिक प्रदर्शन के बचाव के तौर पर देखा जा रहा है। एक ओर सरकार मजबूत विकास दर को उपलब्धि बता रही है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ आंकड़ों और विकास की गुणवत्ता को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं।



