संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में भारत समेत सात साझेदारों ने Partners for Multilateralism, International Law, Peace and Prosperity (P4M) पहल शुरू की। इसका उद्देश्य बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने और संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार के लिए सहयोग बढ़ाना है।
भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने P4M की पहली बैठक में हिस्सा लिया। पहल में भारत के साथ यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा और केन्या शुरुआती सह-प्रायोजक हैं।
न्यूयॉर्क में P4M की पहली बैठक
P4M की पहली बैठक 21 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल वीक के दौरान न्यूयॉर्क में हुई। पहल में अलग-अलग क्षेत्रों और राजनीतिक परंपराओं वाले साझेदारों को साथ लाने की बात कही गई है।
इस पहल का फोकस बहुपक्षवाद, अंतरराष्ट्रीय कानून, शांति और समृद्धि से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाना है। साझेदारों ने संयुक्त घोषणा में बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और समावेशी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत समेत 7 साझेदार देश
P4M के शुरुआती सह-प्रायोजकों में भारत, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा और केन्या शामिल हैं। यह समूह अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग के लिए एक साझा मंच विकसित करने की दिशा में काम करेगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ P4M शिखर बैठक की सह-अध्यक्षता की। जयशंकर ने बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय कानून के महत्व पर जोर दिया।
UN में सुधार पर रहेगा फोकस
P4M की संयुक्त घोषणा में संयुक्त राष्ट्र समेत बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। साझेदारों ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की जरूरत है।
घोषणा में UN80 जैसी पहलों के जरिए संयुक्त राष्ट्र को मजबूत करने की दिशा में सहयोग का भी उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य संघर्षों की रोकथाम, संकटों से निपटने, सतत विकास और मानवाधिकारों की रक्षा जैसे क्षेत्रों में बहुपक्षीय संस्थाओं की क्षमता बढ़ाना है।
वैश्विक चुनौतियों पर भी सहयोग
P4M के एजेंडे में केवल UN सुधार ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और उभरती तकनीकों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। संयुक्त घोषणा में वैश्विक सप्लाई चेन, व्यापार व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे, डिजिटल बदलाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बात कही गई है।
साझेदारों ने आर्थिक सहयोग को अधिक खुला, लचीला, पूर्वानुमेय और समावेशी बनाने की आवश्यकता भी रेखांकित की है।
भारत की भूमिका क्यों अहम?
भारत P4M के शुरुआती सह-प्रायोजकों में शामिल है। बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बहुपक्षीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने की आवश्यकता पर भारत का पक्ष रखा।
P4M की पहल ऐसे समय में सामने आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है और वैश्विक स्तर पर बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार को लेकर चर्चा जारी है। EU के अनुसार, P4M का उद्देश्य मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्था को बदलना नहीं बल्कि उसे मजबूत और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सहयोग बढ़ाना है।
P4M में आगे क्या?
साझेदार देशों ने नियमित संवाद और अन्य क्षेत्रों के साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। संयुक्त घोषणा के अनुसार, P4M के जरिए विभिन्न क्षेत्रों के देशों के बीच संवाद, समन्वय और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी।



