India FTA: ASEAN, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ बढ़ा व्यापार घाटा, जानें वजह

भारत ने ASEAN, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने और भारतीय निर्यातकों को बड़े बाजारों तक पहुंच देने के लिए FTA किए थे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन साझेदारों को भारत का निर्यात भी बढ़ा है, लेकिन पिछले वर्षों में आयात की वृद्धि अपेक्षाकृत तेज रही है।
GTRI के विश्लेषण के अनुसार, 2007-09 की तुलना में 2023-25 तक ASEAN के साथ भारत का व्यापार घाटा 381%, जापान के साथ 318% और दक्षिण कोरिया के साथ 268% बढ़ा। इन तीनों के साथ पिछले तीन वर्षों में भारत का औसत वार्षिक व्यापार घाटा करीब 62 अरब डॉलर रहा।
विशेषज्ञों द्वारा बताए गए कारणों में टैरिफ में असमानता, गैर-टैरिफ बाधाएं, FTA का भारतीय निर्यातकों द्वारा कम इस्तेमाल और घरेलू उत्पादन लागत शामिल हैं। कुछ FTA साझेदार देशों में पहले से ही कई उत्पादों पर कम या शून्य MFN शुल्क होने के कारण भारतीय निर्यातकों को FTA से मिलने वाला अतिरिक्त लाभ सीमित रह सकता है।
जापान के मामले में भी व्यापार घाटा बढ़ा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, भारत का जापान के साथ वस्तु व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2015-16 के करीब 5.18 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 15.4 अरब डॉलर हो गया। सरकारी सूत्रों ने जापान के कड़े गुणवत्ता और सैनिटरी मानकों को भारतीय निर्यातकों के लिए एक चुनौती बताया है।
हालांकि, तस्वीर केवल व्यापार घाटे तक सीमित नहीं है। NITI Aayog के आंकड़ों के अनुसार, FY2025-26 की दूसरी तिमाही में भारत के FTA साझेदारों को निर्यात 38 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 69.8 अरब डॉलर था, जिससे 31 अरब डॉलर का व्यापार घाटा बना। इसी अवधि में जापान को निर्यात 7.5% और दक्षिण कोरिया को 14.7% बढ़ा।



