पिथौरागढ़ POCSO केस में DNA रिपोर्ट से खुलासा, शिक्षक नहीं किशोर निकला नवजात का पिता

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट क्षेत्र में नाबालिग छात्रा से जुड़े चर्चित POCSO मामले में वैज्ञानिक जांच के बाद नया मोड़ आ गया है। DNA रिपोर्ट में सामने आया है कि मृत नवजात का जैविक पिता वह शिक्षक नहीं है, जिसे शुरुआत में इस मामले में नामजद किया गया था। आगे की जांच में एक किशोर का DNA नवजात के नमूनों से मेल खाया है। इस खुलासे के बाद पुलिस ने किशोर के खिलाफ किशोर न्याय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की है।
पहले शिक्षक के खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
मामला जून 2026 में सामने आया था। अस्कोट क्षेत्र की एक नाबालिग छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया था। चिकित्सकीय जांच में उसके गर्भवती होने से जुड़ी जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने शिकायत और शुरुआती जांच के आधार पर शिक्षक योगेश कुमार पांडे के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) और POCSO अधिनियम की धारा 5/6 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
पुलिस ने 24 जुलाई 2026 को शिक्षक के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र भी दाखिल किया था।
नवजात के अवशेषों की DNA जांच से खुला राज
जांच के दौरान पुलिस को मृत नवजात के अवशेष मिले थे। इनके जैविक नमूने DNA परीक्षण के लिए क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला, रुद्रपुर भेजे गए। रिपोर्ट में शिक्षक का DNA नवजात के नमूनों से मेल नहीं खाया।
इसके बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए दो अन्य संदिग्ध व्यक्तियों के रक्त नमूने 12 अक्टूबर को प्रयोगशाला भेजे। DNA रिपोर्ट में एक किशोर का नमूना नवजात के जैविक पिता के रूप में मेल खा गया।
किशोर को संरक्षण में लेकर बाल संप्रेक्षण गृह भेजा
DNA रिपोर्ट और जांच में मिले अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने संबंधित किशोर को संरक्षण में लिया। इसके बाद उसे किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बोर्ड की प्रक्रिया के तहत किशोर को अल्मोड़ा स्थित राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है।
पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे के अनुसार, वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की विवेचना की गई है।
क्या DNA रिपोर्ट से शिक्षक पूरी तरह आरोपमुक्त हो गए?
इस मामले में एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। DNA जांच से यह स्पष्ट हुआ है कि मृत नवजात का जैविक पिता आरोपी शिक्षक नहीं है। लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि शिक्षक के खिलाफ दर्ज पूरा मामला समाप्त हो गया है।
एक अन्य समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने शिक्षक के मोबाइल से कुछ छात्राओं के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिलने की बात भी कही है। पुलिस ने नाबालिग छात्रा के शुरुआती आरोपों और शिक्षक की संभावित भूमिका को लेकर जांच जारी रहने की जानकारी दी है। इसलिए नवजात के जैविक पिता की पहचान और शिक्षक के खिलाफ अन्य आरोपों की जांच को अलग-अलग समझना जरूरी है।
वैज्ञानिक साक्ष्य बने जांच का अहम आधार
अस्कोट का यह मामला बताता है कि गंभीर आपराधिक मामलों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्य कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं। शुरुआत में सामने आए आरोपों के आधार पर कार्रवाई हुई, लेकिन DNA परीक्षण के नतीजों ने नवजात के जैविक पिता की पहचान को लेकर नई जानकारी दी। अब मामले में आगे की पुलिस जांच और किशोर न्याय बोर्ड की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
नोट: मामला नाबालिग से संबंधित है, इसलिए पीड़िता और संबंधित किशोर की पहचान उजागर करने वाली जानकारी साझा नहीं की गई है। DNA रिपोर्ट में जैविक पितृत्व की पुष्टि का अर्थ यह नहीं है कि मामले के सभी आरोपों पर अंतिम निर्णय हो चुका है।



