
भारत 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गौरव और उल्लास के साथ मनाने जा रहा है। इस वर्ष का समारोह कई मायनों में ऐतिहासिक और विशेष होगा। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाले भव्य आयोजन में देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भर भारत की झलक एक साथ देखने को मिलेगी। सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय वायुसेना का फ्लाईपास्ट होगा, जिसमें विमानों द्वारा ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन बनाया जाएगा। यह फॉर्मेशन देश की परंपरा, नारी शक्ति और भारतीय संस्कृति में सिंदूर के महत्व का प्रतीक माना जा रहा है, जो दर्शकों के लिए एक भावनात्मक और गौरवपूर्ण अनुभव होगा।
इस वर्ष की परेड में कुल 30 झांकियां शामिल होंगी, जिनमें विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों की झलक दिखाई देगी। झांकियों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत, लोककलाएं, ऐतिहासिक उपलब्धियां, आधुनिक विकास योजनाएं और भविष्य की तकनीकी सोच को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। हर झांकी अपने संदेश और रंग-बिरंगे स्वरूप के साथ दर्शकों का ध्यान आकर्षित करेगी।
गणतंत्र दिवस समारोह का एक और अनोखा आकर्षण दो कूबड़ वाला ऊंट होगा, जिसे विशेष रूप से परेड में शामिल किया गया है। यह ऊंट न केवल राजस्थान और रेगिस्तानी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करेगा, बल्कि भारत की जैव-विविधता और पारंपरिक धरोहर की याद भी दिलाएगा। यह पहली बार होगा जब इस तरह का विशिष्ट प्रतीक राष्ट्रीय परेड में इतने प्रमुख रूप से देखने को मिलेगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में देशभर से आए लगभग 2500 कलाकार भाग लेंगे। ये कलाकार पारंपरिक नृत्य, लोक संगीत और आधुनिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की एकता में विविधता को मंच पर जीवंत करेंगे। अलग-अलग राज्यों की वेशभूषा, ताल और लय के संगम से कर्तव्य पथ एक रंगीन सांस्कृतिक उत्सव में बदल जाएगा।
समूचा आयोजन सुरक्षा, अनुशासन और तकनीकी उत्कृष्टता के साथ संपन्न होगा। 77वां गणतंत्र दिवस न केवल भारत के संविधान और लोकतंत्र के प्रति सम्मान का प्रतीक बनेगा, बल्कि यह संदेश भी देगा कि भारत अपनी परंपराओं को सहेजते हुए आधुनिकता और विकास की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।



