
जापान में भालुओं के हमले इतनी तेजी से बढ़ गए हैं कि अब स्थिति गंभीर हो गई है। बीते सात महीनों में देशभर में 100 से अधिक भालू हमले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि सरकार को अब सेना (Self-Defense Forces) को मैदान में उतारना पड़ा है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और आक्रामक भालुओं को पकड़ने या नियंत्रित किया जा सके।
जानकारी के अनुसार, भालुओं के हमले मुख्य रूप से होक्काइदो, आओमोरी, और अकिता प्रांतों में बढ़े हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन की कमी और तेजी से घटते प्राकृतिक आवास के कारण भालू अब गांवों और शहरों के किनारों तक पहुंचने लगे हैं। कई बार वे कूड़ेदान या खेतों में घुसकर लोगों पर हमला कर देते हैं।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें और बिना जरूरत जंगलों या सुनसान इलाकों में न जाएं। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को अपने घरों और दरवाजों पर घंटियां लगाने की सलाह दी है ताकि आवाज से भालू डरकर पास न आएं। इसके अलावा स्कूलों में बच्चों को ‘भालू सुरक्षा ड्रिल’ सिखाई जा रही है — जिसमें बताया जा रहा है कि अगर भालू सामने आ जाए तो कैसे शांत रहें और किस दिशा में भागें।
जापान की पर्यावरण एजेंसी के मुताबिक, यह पिछले 30 वर्षों में भालुओं के हमलों का सबसे खतरनाक दौर है। विशेषज्ञों ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई ने भालुओं की प्राकृतिक जीवनशैली पर बड़ा असर डाला है, जिससे वे अब मानव बस्तियों में प्रवेश कर रहे हैं।
सरकार ने सेना के साथ-साथ स्थानीय पुलिस और वन विभाग को भी अलर्ट पर रखा है। ड्रोन की मदद से उन इलाकों की निगरानी की जा रही है जहां भालुओं की गतिविधियां ज्यादा देखी गई हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर “#BearAlertJapan” नाम से एक अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसमें लोग अपने इलाकों की ताजा जानकारी साझा कर रहे हैं।
जापानी नागरिकों में डर का माहौल है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया है कि स्थिति पर काबू पाने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन लगातार बढ़ते हमलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आधुनिक जापान में मानव और वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व अब और कठिन होता जा रहा है?



