
भारतीय रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वंदे भारत एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन के लिए प्लास्टिक प्लेट्स पर रोक लगाने का फैसला किया है। अब इन प्रीमियम ट्रेनों में खाना बायोडिग्रेडेबल थाली और इको-फ्रेंडली कटलरी में परोसा जाएगा। रेलवे का यह निर्णय देश में बढ़ते प्लास्टिक कचरे की समस्या को कम करने और सतत विकास को बढ़ावा देने की नीति का हिस्सा है। लंबे समय से यह चिंता जताई जा रही थी कि ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाली सिंगल यूज़ प्लास्टिक प्लेट्स और चम्मच पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रही हैं, क्योंकि इनका निस्तारण सही तरीके से नहीं हो पाता। नई व्यवस्था के तहत गन्ने की खोई, पत्तल, कागज आधारित सामग्री या अन्य जैविक रूप से नष्ट होने वाली थालियों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे कचरा कम होगा और रिसाइक्लिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस बदलाव से न सिर्फ पर्यावरण को फायदा होगा बल्कि यात्रियों को भी अधिक सुरक्षित और स्वच्छ भोजन अनुभव मिलेगा। वंदे भारत और शताब्दी जैसी ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को अब यह एहसास होगा कि उनका सफर केवल आरामदायक ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदार भी है। इसके साथ ही रेलवे कैटरिंग एजेंसियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे प्लास्टिक के उपयोग से पूरी तरह बचें और निर्धारित मानकों के अनुरूप ही बायोडिग्रेडेबल सामग्री का इस्तेमाल करें। सरकार का मानना है कि इस पहल से अन्य ट्रेनों और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में भी ऐसे पर्यावरण-अनुकूल प्रयोगों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी। आने वाले समय में रेलवे का लक्ष्य है कि सभी प्रमुख ट्रेनों से सिंगल यूज़ प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए। कुल मिलाकर, यह कदम न सिर्फ स्वच्छ भारत और हरित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में अहम है, बल्कि यात्रियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक प्रभावी माध्यम साबित होगा।



