उप निबंधक कार्यालयों में बड़ा सुधार: 6 महीने में पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेज होंगे पूरी तरह डिजिटाइज

प्रदेश के उप निबंधक कार्यालयों में वर्षों पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेजों को सुरक्षित और सुलभ बनाने की दिशा में सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। अब सभी पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन महज छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इस पहल से न केवल प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम नागरिकों को भी अपने दस्तावेज प्राप्त करने में होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। अभी तक कई बार दस्तावेजों की फाइलें खराब हो जाने, गुम हो जाने या समय पर न मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिन्हें डिजिटाइजेशन के माध्यम से काफी हद तक समाप्त किया जा सकेगा।
डिजिटाइजेशन की इस प्रक्रिया के तहत उप निबंधक कार्यालयों में मौजूद रजिस्ट्री, बैनामा, वसीयत, लीज और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों को स्कैन कर सुरक्षित डिजिटल फॉर्मेट में संग्रहित किया जाएगा। इससे न सिर्फ दस्तावेजों की उम्र बढ़ेगी, बल्कि आग, पानी या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का खतरा भी कम होगा। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से जरूरत पड़ने पर दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति आसानी से ऑनलाइन या कार्यालय के माध्यम से प्राप्त की जा सकेगी।
सरकार का मानना है कि इस कदम से भूमि विवादों को सुलझाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की संभावना बेहद कम होती है। साथ ही, रजिस्ट्री से जुड़े मामलों में फर्जीवाड़े पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। आम नागरिकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और समय व धन दोनों की बचत होगी।
इस परियोजना के लिए आधुनिक स्कैनिंग मशीनें, सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि तय समयसीमा के भीतर काम की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न किया जाए। डिजिटाइजेशन पूरा होने के बाद उप निबंधक कार्यालयों की कार्यप्रणाली और अधिक तेज, पारदर्शी और जनहितैषी बन सकेगी। कुल मिलाकर, छह महीने में पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन पूरा होने से प्रशासनिक सुधारों को नई गति मिलेगी और डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।



