मुख्यमंत्री ने गोमती नदी में सीवर प्रणाली की रिपोर्ट तैयार करने के दिए निर्देश, मोहल्ला स्तर पर होगी जांच

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हाल ही में गोमती नदी के संरक्षण और सफाई को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नदी में जाने वाले सभी सीवर की स्थिति का मोहल्ला-वार विस्तृत सर्वेक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जाए। बैठक में अधिकारियों को यह निर्देश दिए गए कि हर मोहल्ले से गोमती में सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से निकलने वाले सीवर की संख्या, उनकी गुणवत्ता, निकासी का मार्ग और किसी भी प्रकार के अवैध कनेक्शन की जानकारी संकलित की जाए। इस रिपोर्ट का उद्देश्य न केवल नदी में जल प्रदूषण को कम करना है, बल्कि जल संरक्षण और नदी के पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा को भी सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए नगर निगम और संबंधित जल निकासी विभाग के तकनीकी दलों को कार्यभार सौंपा जाएगा, जो मोहल्ला-वार निरीक्षण और डेटा संग्रह करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोमती नदी की सफाई और संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और एनजीओ की भागीदारी भी अनिवार्य होगी। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि रिपोर्ट में सीवर के विभिन्न प्रकार, उनकी मरम्मत की आवश्यकता और प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कदमों का विस्तृत उल्लेख होना चाहिए। इसके साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक मोहल्ले में स्थायी निगरानी तंत्र स्थापित किया जाए, जिससे किसी भी तरह के अवैध या दूषित जल का प्रवाह तुरंत पकड़ा जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम गोमती नदी को स्वच्छ और जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि नदी के प्रदूषण का मुख्य स्रोत नगरीय सीवर प्रणाली ही है। मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ कहा कि रिपोर्ट की समयबद्धता अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके निष्कर्षों के आधार पर अगले चरण में तकनीकी और नीति संबंधी सुधार लागू किए जाएंगे। इस पहल से न केवल नदी की सफाई में सुधार होगा, बल्कि नागरिकों में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी, जिससे गोमती नदी का पारिस्थितिक और सामाजिक महत्व मजबूत बनेगा।



