तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। कल तक साथ मिलकर सरकार बनाने वाले दल आज आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। विजय के मुख्यमंत्री बनते ही सहयोगी पार्टी ने कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर कर दी है। बताया जा रहा है कि मंत्रालयों के बंटवारे और फैसलों में सहयोगियों की अनदेखी से विवाद बढ़ा। इस तकरार ने राज्य की नई सरकार की स्थिरता को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
सरकार गठन के बाद शुरू हुई इस खींचतान ने तमिलनाडु की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। विपक्ष भी इस मौके को भुनाने में जुट गया है और गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर जल्द ही विवाद नहीं सुलझा तो सरकार के लिए आगे की राह मुश्किल हो सकती है। वहीं विजय की पार्टी लगातार यह दावा कर रही है कि गठबंधन पूरी तरह मजबूत है और सभी मुद्दों का समाधान बातचीत से निकाल लिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक सहयोगी दल के नेताओं को उम्मीद थी कि सरकार में उन्हें ज्यादा अहमियत मिलेगी, लेकिन शुरुआती फैसलों से वे संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। यही वजह है कि नाराजगी अब सार्वजनिक बयानबाजी तक पहुंच गई है। तमिलनाडु में जनता भी इस नए राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि चुनाव के दौरान गठबंधन ने स्थिर और मजबूत सरकार देने का वादा किया था।
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