
भारत की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा खरीद मैनुअल 2025 (Defence Procurement Manual 2025) को मंजूरी दे दी है। इस मैनुअल का मुख्य उद्देश्य सैनिकों की जरूरतों को समय पर पूरा करना, रक्षा खरीद प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाना तथा देश को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। रक्षा खरीद मैनुअल 2025 इसी दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। इसके माध्यम से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि स्वदेशी उद्योगों और स्टार्टअप्स को भी रक्षा उपकरण निर्माण में शामिल होने का अवसर मिलेगा। यह कदम भारत को विश्वस्तरीय रक्षा निर्यातक बनाने की दिशा में भी मदद करेगा।
रक्षा खरीद मैनुअल 2025 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सैनिकों की तात्कालिक आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी गई है। अब खरीद प्रक्रिया में लगने वाला समय घटाया जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर सेना को तुरंत आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जा सकें। इससे भारत की सैन्य शक्ति और तेजी से मजबूत होगी।
राजनाथ सिंह ने कहा है कि यह मैनुअल सैनिकों की अपेक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और ‘ई-गवर्नेंस’ पर खास ध्यान दिया गया है। सभी प्रक्रियाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होंगी ताकि किसी भी स्तर पर देरी या भ्रष्टाचार की संभावना न रहे।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई नीति से छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भी बड़ा लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर हथियारों, बुलेटप्रूफ जैकेट्स, ड्रोन, निगरानी उपकरण और संचार प्रणाली जैसे संसाधनों का उत्पादन बढ़ेगा। इससे न केवल सेना को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित होगी बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इस मैनुअल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें तकनीकी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। सरकार का प्रयास है कि भारत रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बने और दुनिया की अन्य बड़ी सेनाओं के बराबर खड़ा हो सके।
निष्कर्षतः, रक्षा खरीद मैनुअल 2025 का लागू होना भारतीय सेना के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इससे सैनिकों की जरूरतें समय पर पूरी होंगी, स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। यह कदम भारत को एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।



