यूपी में 9.8 करोड़ बच्चों को कृमि मुक्ति दवा, 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

उत्तर प्रदेश में बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। 10 फरवरी को मनाए जाने वाले राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर राज्य में लगभग 9.8 करोड़ बच्चों को कीड़े मारने की दवा (एल्बेंडाजोल) खिलाई जाएगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों में होने वाले पेट के कीड़ों से होने वाली बीमारियों को रोकना और उनके शारीरिक व मानसिक विकास को सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आंतों में मौजूद कीड़े बच्चों में एनीमिया, कुपोषण, कमजोरी और पढ़ाई में ध्यान की कमी जैसी समस्याएं पैदा करते हैं। इन्हीं समस्याओं से निपटने के लिए केंद्र सरकार के निर्देश पर हर साल राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश में यह अभियान बड़े पैमाने पर स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से चलाया जाएगा।
इस कार्यक्रम के तहत 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को दवा दी जाएगी। जिन बच्चों की उम्र 1 से 2 वर्ष के बीच है, उन्हें एल्बेंडाजोल की आधी खुराक दी जाएगी, जबकि 2 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को पूरी खुराक खिलाई जाएगी। स्वास्थ्य कर्मियों, शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पहले से ही इस अभियान के लिए प्रशिक्षित किया गया है ताकि दवा सुरक्षित तरीके से दी जा सके।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जिन बच्चे 10 फरवरी को किसी कारणवश दवा नहीं ले पाएंगे, उनके लिए 15 फरवरी को मॉप-अप डे रखा गया है। इस दिन छूटे हुए बच्चों को दवा दी जाएगी ताकि कोई भी बच्चा इस स्वास्थ्य सुरक्षा अभियान से वंचित न रह जाए।
राज्य सरकार का मानना है कि कृमि मुक्ति अभियान बच्चों के संपूर्ण विकास में अहम भूमिका निभाएगा। नियमित रूप से कीड़े मारने की दवा दिए जाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, पोषण स्तर सुधरता है और स्कूल में उनकी उपस्थिति व सीखने की क्षमता बेहतर होती है। इस तरह राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस न केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और सशक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।



