
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 8 साल बाद एक बड़ा खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के साथ उसका बेटा रोहन चोकसी भी कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। ED का दावा है कि जांच के दौरान मिले दस्तावेज़ों, बैंक ट्रांजैक्शन और शेल कंपनियों के नेटवर्क से यह संकेत मिला है कि रोहन चोकसी ने विदेशों में बनाए गए कई खातों और कंपनियों के जरिए अवैध धन को इधर-उधर करने में मदद की। एजेंसी का कहना है कि घोटाले से जुड़े पैसे को भारत से बाहर भेजने, उसे छिपाने और वैध दिखाने की साजिश में परिवार के करीबी सदस्यों की भूमिका की जांच लंबे समय से चल रही थी, जिसमें अब नए सबूत सामने आए हैं।
ED सूत्रों के मुताबिक, मेहुल चोकसी के स्वामित्व वाली कंपनियों और ट्रस्ट के माध्यम से कई संदिग्ध लेन-देन किए गए, जिनमें रोहन चोकसी के नाम या नियंत्रण से जुड़े संस्थानों का भी इस्तेमाल हुआ। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ निवेश विदेशी संपत्तियों, रियल एस्टेट और लक्ज़री एसेट्स में लगाए गए, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके। एजेंसी ने इन लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत संदिग्ध माना है और संबंधित दस्तावेज़ों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
गौरतलब है कि मेहुल चोकसी पहले से ही PNB घोटाले का प्रमुख आरोपी है और वह भारत से फरार चल रहा है। रोहन चोकसी की भूमिका को लेकर अब तक सार्वजनिक रूप से कम जानकारी थी, लेकिन ED के ताज़ा दावों के बाद मामला और गंभीर हो गया है। एजेंसी का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ाया गया है और विदेशों में मौजूद संपत्तियों की कुर्की व कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित देशों से सहयोग मांगा गया है। हालांकि, इस पूरे मामले में रोहन चोकसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में ED की कार्रवाई और अदालत में पेश होने वाले सबूत इस बहुचर्चित घोटाले में नए मोड़ ला सकते हैं।



