
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में यूरोप का दौरा किया, जहां उन्होंने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य भारत-यूरोप संबंधों को मजबूती प्रदान करना और क्षेत्रीय तथा वैश्विक सुरक्षा के महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करना था। होर्मुज जलसंधि में हाल ही में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर जयशंकर ने यूरोपीय नेताओं को विस्तार से स्थिति समझाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण स्थिरता और संवाद के माध्यम से समाधान की ओर है, और किसी भी प्रकार के सैन्य टकराव से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक साझेदारी और व्यापार समझौतों (FTA – Free Trade Agreement) की संभावनाओं पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने यह जोर देकर कहा कि भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंधों में संतुलन, पारदर्शिता और साझा अवसरों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इसके अलावा, जयशंकर ने तकनीकी सहयोग, हरित ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने की योजना पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के लिए यह समय महत्वपूर्ण है कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच मिलकर स्थिर और टिकाऊ सहयोग के मॉडल विकसित किए जाएँ।
इसके अलावा, जयशंकर ने कोविड-19 महामारी के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग, वैज्ञानिक अनुसंधान और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर भी चर्चा की। उन्होंने यूरोपीय नेताओं को आश्वस्त किया कि भारत निवेश और तकनीकी सहयोग के लिए खुले विचारों वाला और भरोसेमंद भागीदार है। सुरक्षा, आतंकवाद रोधी सहयोग और समुद्री सुरक्षा जैसे रणनीतिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इस दौरे के दौरान, भारत और यूरोपीय देशों के बीच राजनयिक वार्ता ने दोनों पक्षों को न केवल मौजूदा चुनौतियों को समझने का अवसर दिया बल्कि भविष्य में सहयोग की नई राहें खोजने का भी अवसर प्रदान किया। जयशंकर की ये वार्ताएं भारत की विदेश नीति में संतुलित, सक्रिय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।



