
होर्मुज जलडमरूमध्य से भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ‘ग्रीन आशा’ नाम का आठवां जहाज 20 हजार टन एलपीजी लेकर देश की ओर रवाना हो चुका है। वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के बीच यह खेप भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की निरंतर आपूर्ति से घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता बनी रहेगी और कीमतों पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
होर्मुज क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद इस जहाज का सुरक्षित रवाना होना भारत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम के चलते ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं, लेकिन ‘ग्रीन आशा’ जैसे जहाजों की आवाजाही से स्थिति कुछ हद तक सामान्य होती दिख रही है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखने के प्रयास लगातार जारी हैं।
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे में इस तरह की खेपें देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। खासकर घरेलू उपयोग और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार और तेल कंपनियां सप्लाई को निर्बाध बनाए रखने पर जोर दे रही हैं। आने वाले दिनों में और जहाजों के पहुंचने की उम्मीद है, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता बनी रह सकती है और उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।



