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लश्कर समर्थित TRF कैसे जुटाता है आतंक के लिए फंड? NIA जांच में बड़ा खुलासा

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की हालिया जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए फंड जुटाने का एक संगठित नेटवर्क चला रहा है। जांच में सामने आया है कि TRF हवाला चैनलों, क्रिप्टोकरेंसी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और चंदे के नाम पर फंडिंग कर रहा है। इसका मकसद कश्मीर घाटी और भारत के अन्य हिस्सों में युवाओं को गुमराह कर उन्हें आतंक की राह पर धकेलना है।

NIA के अनुसार, TRF सीधे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI इसके संचालन में अहम भूमिका निभा रही है। संगठन ने आतंकी फंडिंग के लिए कई फ्रंट ग्रुप और एनजीओ तैयार किए हैं जो सामाजिक कार्य और मदद के नाम पर पैसों की उगाही करते हैं। बाद में यही पैसा आतंकियों तक पहुंचाया जाता है। खास बात यह है कि फंडिंग के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

हवाला रैकेट TRF के फंड जुटाने का सबसे बड़ा जरिया है। जांच में पता चला कि खाड़ी देशों और पाकिस्तान में बैठे लश्कर समर्थक लोग हवाला के जरिए करोड़ों रुपये भारत में भेज रहे हैं। ये रकम छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर स्थानीय नेटवर्क तक पहुंचाई जाती है, ताकि किसी सुरक्षा एजेंसी को संदेह न हो। इसके अलावा, बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल भी फंड ट्रांसफर में तेजी से बढ़ा है, जिससे पैसों का ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

NIA ने अपनी जांच में पाया कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी TRF ने फंड जुटाने का तंत्र विकसित किया है। कुछ कथित ‘ह्यूमैनिटेरियन कैंपेन’ और ऑनलाइन डोनेशन ड्राइव आतंकियों के समर्थन में चलाई जाती हैं। इनमें जुटाए गए पैसे सीधे आतंकी गतिविधियों के लिए उपयोग होते हैं। यही नहीं, स्थानीय स्तर पर कुछ व्यवसायों और पत्थरबाजी जैसे अवैध तरीकों से भी TRF पैसा जुटाता है।

इस फंड का इस्तेमाल आतंकियों की भर्ती, हथियार खरीदने, विस्फोटक सामग्री जुटाने और सीमा पार से आने वाले आतंकियों की मदद करने में होता है। NIA की रिपोर्ट ने साफ किया है कि TRF केवल नाम भर का नया संगठन है, असल में यह लश्कर-ए-तैयबा का ही विस्तार है। इस संगठन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सख्ती और लश्कर की बदनामी के बाद एक ‘सॉफ्ट फेस’ के रूप में खड़ा किया गया, ताकि आतंकी गतिविधियों को नया नाम देकर संचालित किया जा सके।

NIA की जांच के बाद अब भारत सरकार इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कार्रवाई तेज कर चुकी है। हवाला ऑपरेटरों, संदिग्ध एनजीओ और ऑनलाइन फंडिंग चैनलों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि TRF जैसे संगठनों की फंडिंग चेन तोड़ना आतंकवाद की जड़ों को कमजोर करने में सबसे अहम कदम है।

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