
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने विक्ट्री डे परेड के अवसर पर एक बेहद सख्त और साफ संदेश दिया है। उन्होंने अपने भाषण में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना ही स्पष्ट कहा कि “हम धौंस जमाने वालों से डरते नहीं हैं और न कभी डरेंगे।” चिनफिंग का यह बयान सीधे तौर पर ट्रंप और अमेरिका की ओर इशारा माना जा रहा है, जिन्होंने बीते कुछ समय से चीन के खिलाफ तीखे बयान और नीतियां अपनाई थीं। यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर चीन और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, खासकर व्यापार, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और ताइवान मुद्दे को लेकर।
विक्ट्री डे परेड चीन के लिए सिर्फ एक परंपरागत आयोजन नहीं, बल्कि अपनी शक्ति और सामर्थ्य दिखाने का एक बड़ा मंच भी है। इस परेड में चीन की आधुनिक सैन्य ताकत, मिसाइलें, ड्रोन और अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया गया। यही कारण है कि शी चिनफिंग ने इस मंच से अमेरिका और पश्चिमी देशों को यह संदेश देने की कोशिश की कि चीन किसी भी तरह की दबाव राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि चीन का विकास किसी भी देश के खिलाफ नहीं है, लेकिन यदि कोई चीन के हितों को चुनौती देगा, तो उसका जवाब मजबूती से दिया जाएगा।
ट्रंप के कार्यकाल में चीन-अमेरिका के रिश्ते कई बार टकराव की स्थिति में पहुंचे थे। व्यापार युद्ध, तकनीकी प्रतिबंध, और कोविड-19 को लेकर आरोप-प्रत्यारोप ने दोनों देशों के रिश्तों को और भी बिगाड़ दिया था। ट्रंप के बयानों में अक्सर चीन को कठघरे में खड़ा किया जाता था। ऐसे में चिनफिंग का यह बयान न सिर्फ ट्रंप के लिए जवाब है, बल्कि उन सभी ताकतों के लिए चेतावनी भी है जो चीन को कमजोर दिखाने की कोशिश करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चिनफिंग का यह दो टूक संदेश चीन की आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को दर्शाता है। चीन यह दिखाना चाहता है कि वह अब केवल एक उभरती हुई ताकत नहीं, बल्कि एक निर्णायक वैश्विक शक्ति बन चुका है। इस बयान का असर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दिखेगा, क्योंकि इससे यह साफ हो गया है कि चीन अब केवल आर्थिक शक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर भी खुद को अमेरिका के बराबर खड़ा करना चाहता है।
विक्ट्री डे परेड के इस मौके पर चिनफिंग ने अपने सैनिकों और नागरिकों को भी यह भरोसा दिलाया कि चीन की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चीन शांति का पक्षधर है, लेकिन यदि किसी ने उसकी शांति को चुनौती दी, तो चीन पीछे हटने वालों में से नहीं होगा।
निष्कर्षतः, शी चिनफिंग का यह बयान सिर्फ ट्रंप के लिए सीधा संदेश नहीं है, बल्कि पूरे विश्व के लिए चीन की नई आक्रामक और आत्मविश्वासी विदेश नीति का ऐलान है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि चीन अब किसी भी दबाव या धौंस के आगे झुकने वाला नहीं है।



