
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने हाल ही में एक ऐसा बयान दिया, जिसने मीडिया और जनचर्चा में व्यापक स्थान बना लिया। उन्होंने कहा – “मैं पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।” उनका यह बयान उस फैसले के संदर्भ में आया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों (Stray Dogs) से जुड़ी एक अहम याचिका पर अपना निर्णय सुनाया था। दरअसल, भारत में लंबे समय से आवारा कुत्तों की समस्या चर्चा का विषय रही है। कई जगहों पर इनके काटने से लोगों की जान तक चली जाती है, तो कई स्थानों पर पालतू पशु प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के बीच विवाद खड़ा हो जाता है।
जस्टिस विक्रम नाथ के इस फैसले को लेकर न केवल भारत, बल्कि विदेशों तक में प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। उन्होंने स्वयं कहा कि इस विषय पर फैसला सुनाने के बाद उनके पास देश-दुनिया से संदेश आने लगे। लोग उनसे संपर्क करने लगे और इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय साझा करने लगे। यही वजह है कि उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि “आवारा कुत्तों के फैसले की वजह से मैं मशहूर हो गया हूं।”
आवारा कुत्तों से जुड़ी समस्या केवल भारत की नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में देखने को मिलती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में संतुलन साधने की कोशिश की, ताकि एक तरफ इंसानों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और दूसरी तरफ पशुओं के अधिकारों का भी संरक्षण हो सके। कोर्ट का मानना है कि समाज में इंसान और जानवर दोनों का सहअस्तित्व जरूरी है, लेकिन इसके लिए ठोस नीतियों और उपायों की आवश्यकता है।
इस फैसले के बाद कई सामाजिक संगठनों, एनजीओ और आम नागरिकों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने कोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि यह मानव जीवन की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है, वहीं कुछ ने चिंता जताई कि इससे पशु संरक्षण के अधिकारों पर आंच न आ जाए।
जस्टिस विक्रम नाथ का यह बयान इस बात का प्रतीक है कि न्यायपालिका के फैसले केवल अदालत की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज और जनजीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। आवारा कुत्तों से जुड़ा यह निर्णय निश्चित रूप से आने वाले समय में नीतियों और कानून बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने जस्टिस नाथ को न सिर्फ भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर चर्चा का केंद्र बना दिया है।



