सुदृढ़ कानून व्यवस्था का असर: ‘फियर ज़ोन’ से ‘फेयर ज़ोन’ बना यूपी, माघ मेला में 21 करोड़ श्रद्धालु

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर पिछले कुछ वर्षों में जो बदलाव दिखाई दिए हैं, उन्हें सरकार अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनती है। यही कारण है कि अक्सर यह कहा जा रहा है कि प्रदेश अब ‘फियर ज़ोन’ से निकलकर ‘फेयर ज़ोन’ बन चुका है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही में आयोजित माघ मेला माना जा रहा है, जहां रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर स्नान और पूजा-अर्चना की। प्रशासन का दावा है कि बेहतर सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, साफ-सफाई और सुविधाओं की वजह से इस बार आम लोगों का भरोसा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है।
मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन कैमरों से मॉनिटरिंग और हेल्प डेस्क जैसी व्यवस्थाओं ने लोगों को सुरक्षा का अहसास कराया। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी माना कि उन्हें आने-जाने और ठहरने में पहले की तुलना में अधिक सहूलियत मिली। व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि शांति और सुव्यवस्था से धार्मिक आयोजनों में भागीदारी बढ़ती है, जिससे अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
सरकार का संदेश साफ है—अब प्रदेश दंगों और कर्फ्यू की पहचान से आगे बढ़ चुका है। निवेश, पर्यटन और धार्मिक आयोजनों के लिए सुरक्षित माहौल बनाना प्राथमिकता है। यही वजह है कि बड़े स्तर के आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और कानून व्यवस्था को लेकर लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। माघ मेला में भारी संख्या में लोगों का पहुंचना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि जनता के बीच विश्वास का दायरा बढ़ा है।
‘अब ना कर्फ्यू है, ना दंगा है… अब यूपी में सब चंगा है’ जैसे नारे इसी बदली हुई छवि को रेखांकित करते हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कानून व्यवस्था में सुधार का सीधा असर सामाजिक माहौल पर पड़ता है। जब लोगों को सुरक्षा का भरोसा होता है, तो वे धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। माघ मेला में उमड़ी भीड़ को इसी बदलाव की तस्वीर के रूप में पेश किया जा रहा है, जिसे सरकार अपने सुशासन मॉडल की सफलता मानती है।



