
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर अब सिर्फ इंसानों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पालतू जानवर भी इसकी मार झेल रहे हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक दुबई में हजारों लोग अचानक शहर छोड़कर जा रहे हैं और इस अफरा-तफरी के बीच कई पालतू कुत्तों और बिल्लियों को लावारिस छोड़ दिया जा रहा है। युद्ध के डर और अनिश्चित भविष्य के कारण कई परिवार जल्दबाजी में देश छोड़ रहे हैं, जिससे उनके पालतू जानवर सड़कों पर भटकने को मजबूर हो गए हैं।
स्थानीय पशु संरक्षण संगठनों और वॉलंटियर्स का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में सड़कों, पार्कों और रिहायशी इलाकों में छोड़े गए पालतू जानवरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई कुत्ते और बिल्लियां अपने मालिकों के घरों के बाहर या आसपास ही घूमते दिखाई दे रहे हैं, मानो वे अभी भी अपने मालिकों का इंतजार कर रहे हों। कुछ जानवरों को बिना खाना-पानी के छोड़ दिया गया है, जिससे उनकी हालत खराब होती जा रही है।
पशु बचाव संगठनों ने लोगों से अपील की है कि अगर वे किसी कारणवश अपने पालतू जानवरों को साथ नहीं ले जा सकते, तो उन्हें किसी सुरक्षित शेल्टर या एनिमल केयर सेंटर में छोड़ें। सोशल मीडिया पर भी कई लोग इन जानवरों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। कई स्वयंसेवक घायल या भूखे जानवरों को रेस्क्यू करके उन्हें अस्थायी शेल्टर तक पहुंचा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पालतू जानवर अपने मालिकों से भावनात्मक रूप से बहुत जुड़े होते हैं। ऐसे में अचानक छोड़ दिए जाने से वे मानसिक तनाव, भूख और बीमारी का शिकार हो सकते हैं। कई जानवर डर के कारण आक्रामक भी हो जाते हैं, जिससे आसपास के लोगों के लिए भी खतरा बढ़ सकता है।
इस स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संकट के समय इंसानों के साथ-साथ जानवरों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पालतू जानवर कोई सामान नहीं हैं जिन्हें मुश्किल समय में छोड़ दिया जाए। वे परिवार का हिस्सा होते हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हर मालिक की नैतिक जिम्मेदारी है।
वर्तमान हालात को देखते हुए पशु संरक्षण संगठन दुबई प्रशासन से भी अपील कर रहे हैं कि छोड़े गए जानवरों के लिए अस्थायी शेल्टर और मेडिकल सहायता की व्यवस्था की जाए, ताकि इस मानवीय संकट के बीच मासूम जानवरों की जान बचाई जा सके। 🐾



