कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा विवाद एक बार फिर उग्र होता दिखाई दे रहा है। हाल ही में हुई घातक झड़पों और रॉकेट हमलों में दोनों ओर के सैनिकों के हताहत होने की खबर है, जिससे क्षेत्रीय तनाव चरम पर पहुंच गया है। कंबोडिया सरकार ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए शांति की अपील की है और युद्धविराम की मांग की है ताकि और अधिक जान-माल की हानि रोकी जा सके। इस संघर्ष का असर सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आसपास के देशों और वैश्विक समुदाय की चिंता भी बढ़ गई है। भारत सरकार ने त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए अपने नागरिकों के लिए एक यात्रा एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें कंबोडिया-थाईलैंड सीमा क्षेत्र से दूर रहने की सख्त सलाह दी गई है। एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि जो भारतीय पहले से इन क्षेत्रों में हैं, वे स्थानीय प्रशासन से संपर्क बनाए रखें और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें। इस घटनाक्रम ने दक्षिण-पूर्वी एशिया की स्थिरता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर स्थिति को जल्द नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर ASEAN और संयुक्त राष्ट्र से भी शांति स्थापना के लिए हस्तक्षेप की उम्मीद की जा रही है। ऐसे में भारत सहित कई देशों की नजरें अब इन दोनों पड़ोसी देशों की अगली रणनीतिक चाल पर टिकी हैं।
कंबोडिया और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद एक बार फिर उभर कर सामने आया है। दोनों देशों के बीच कई वर्षों से तनाव बना हुआ है, खासकर उस क्षेत्र को लेकर जिसे दोनों देश अपना बताते हैं। हालिया हिंसक घटनाएं उसी विवादित सीमा क्षेत्र में हुईं, जहां दोनों सेनाओं के बीच भारी गोलीबारी और रॉकेट हमले हुए। कई नागरिकों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं।
भारत सरकार की ओर से जारी की गई यात्रा एडवाइजरी में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मौजूदा हालात “अनिश्चित और अस्थिर” हैं, और नागरिकों को इस क्षेत्र से दूरी बनाए रखनी चाहिए। भारत ने वहां रह रहे अपने नागरिकों से संपर्क में रहने की अपील की है और जरूरत पड़ने पर स्थानीय भारतीय दूतावास से सहायता लेने की सलाह भी दी है। यह एडवाइजरी उन छात्रों, टूरिस्ट्स और बिज़नेस ट्रैवलर्स के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो इन दोनों देशों में नियमित आवाजाही करते हैं।
इस संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चिंता जताई जा रही है। ASEAN जैसे क्षेत्रीय संगठन के सदस्य देश जल्द ही एक विशेष आपात बैठक बुलाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें शांति स्थापना को प्राथमिक एजेंडा बनाया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव की ओर से भी दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की गई है। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं और अगर समय रहते हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो यह स्थानीय संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।



