
लंदन में महात्मा गांधी की प्रतिष्ठित प्रतिमा के साथ की गई तोड़फोड़ की घटना ने भारत और ब्रिटेन दोनों देशों के नागरिकों की भावनाओं को आहत किया है। यह घटना लंदन के कंजर्वेटिव स्क्वायर में स्थित गांधी प्रतिमा पर हुई, जो भारत और ब्रिटेन के ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक मानी जाती है।
भारतीय उच्चायोग ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए ब्रिटिश अधिकारियों से शीघ्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उच्चायोग ने इसे न केवल भारत के महापुरुष का अपमान माना है, बल्कि एक ऐसे वैश्विक नेता के विरुद्ध हमला बताया है, जिसने पूरी दुनिया को अहिंसा और सत्याग्रह का संदेश दिया।
यह घटना गांधी जयंती से ठीक पहले सामने आई है, जिससे इसकी गंभीरता और भी बढ़ जाती है। गांधी जी की प्रतिमा को जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया गया या यह कोई अनजाने में हुआ कृत्य था, इस बारे में ब्रिटिश पुलिस ने जांच प्रारंभ कर दी है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रतिमा पर कुछ अज्ञात लोगों ने रात के समय हमला किया, जिसमें मूर्ति के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुँचा है।
इस घटना के बाद भारतीय समुदाय में भारी रोष व्याप्त है। कई सामाजिक संगठनों और प्रवासी भारतीयों ने इसे एक सांस्कृतिक आक्रमण बताया है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब यह प्रतिमा उच्च निगरानी वाले क्षेत्र में स्थित है, तो ऐसी घटना कैसे संभव हुई।
भारतीय उच्चायोग ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि ब्रिटेन सरकार को जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें कड़ी सजा दिलानी चाहिए। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
यह घटना सिर्फ एक प्रतिमा के क्षतिग्रस्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक प्रतीकों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में सम्मान की भावना पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।



