
रूस के एक विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों के साथ हुई कथित बदसलूकी और डराने–धमकाने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और छात्रों के बयान के मुताबिक कुछ स्थानीय युवकों ने न केवल नस्लीय टिप्पणियां कीं, बल्कि नाजी नारे लगाए और स्वास्तिक जैसे प्रतीकों का प्रदर्शन भी किया। छात्रों का कहना है कि माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया और उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर महसूस होने लगा। घटना के बाद कई भारतीय छात्रों ने हॉस्टल से बाहर निकलने से बचने और समूह में रहने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत मामूली कहासुनी से हुई, जो देखते ही देखते उग्र रूप ले गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावरों ने धमकी भरे अंदाज में घेरने की कोशिश की, जिसके बाद अफरा-तफरी मच गई। कुछ छात्रों ने तुरंत विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस को सूचना दी। इसके बाद सुरक्षा बढ़ाई गई और कैंपस में गश्त तेज कर दी गई। हालांकि छात्रों का आरोप है कि शुरुआती प्रतिक्रिया उतनी तेज नहीं थी, जितनी होनी चाहिए थी।
घटना की खबर फैलते ही भारत में परिवारों की चिंता बढ़ गई। कई अभिभावकों ने विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है। भारतीय दूतावास ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और रूसी अधिकारियों से बात की है। दूतावास की ओर से छात्रों को हेल्पलाइन नंबर जारी कर सतर्क रहने, अनावश्यक बाहर न निकलने और किसी भी परेशानी की तुरंत सूचना देने को कहा गया है।
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बयान जारी कर कहा है कि कैंपस में किसी भी तरह के नस्लवाद या हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोपियों की पहचान कर जांच की बात कही गई है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा दिया गया है। इसके बावजूद छात्रों के बीच भय का माहौल बना हुआ है और वे चाहते हैं कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
यह घटना एक बार फिर विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा के मुद्दे को सामने ले आई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई के लिए विदेश जा रहे हैं, ऐसे में मेजबान संस्थानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल दें। फिलहाल सभी की नजर जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है, ताकि छात्रों का भरोसा बहाल हो सके।



