
भारत और कनाडा के बीच सुरक्षा और खुफिया सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। हाल ही में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और कनाडा के NSA के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता में यह सहमति बनी कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संपर्क अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। यह कदम दोनों देशों के बीच सुरक्षा, खुफिया जानकारी साझा करने और रणनीतिक सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है।
वार्ता में दोनों पक्षों ने सीमा सुरक्षा, आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने के मामलों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। दोनों देशों ने यह भी स्पष्ट किया कि संपर्क अधिकारी का मुख्य काम संबंधित सुरक्षा मामलों में जानकारी साझा करना, संयुक्त रणनीति तैयार करना और दोनों देशों के खुफिया नेटवर्क को बेहतर ढंग से जोड़ना होगा। इससे न केवल आतंकवाद और संगठित अपराध के मामलों में तेजी आएगी, बल्कि संभावित खतरों का पूर्वानुमान लगाने और उन्हें रोकने की क्षमता भी बढ़ेगी।
भारत और कनाडा की यह पहल वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापार, शिक्षा और तकनीकी सहयोग के क्षेत्रों में तेजी से साझेदारी बढ़ाई है, और अब यह कदम सुरक्षा सहयोग को नई ऊँचाई प्रदान करेगा। NSA डोभाल ने इस अवसर पर कहा कि भारत और कनाडा के बीच सुरक्षा सहयोग का यह नया ढांचा दोनों देशों के नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करेगा और आतंकवाद और साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों का सामना करने में सहायक सिद्ध होगा।
इसके अलावा, दोनों देशों के NSA ने यह भी सहमति व्यक्त की कि भविष्य में समय-समय पर उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की जाएंगी, जिससे द्विपक्षीय सहयोग लगातार बढ़ता रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सहयोग से न केवल भारत और कनाडा के बीच विश्वास मजबूत होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह दोनों देशों की सुरक्षा नीति को एक नई दिशा देगा।
इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य लगातार बदल रहा है और नई चुनौतियां लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में भारत और कनाडा जैसे लोकतांत्रिक और विकसित देशों के बीच स्थायी संपर्क अधिकारी का होना, सुरक्षा मामलों में समय पर निर्णय लेने और प्रतिक्रिया देने में बेहद कारगर साबित होगा।



