
अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए फैसले के बाद टेक इंडस्ट्री में खौफ का माहौल फैल गया है। हाल ही में मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों ने अपने विदेशी कर्मचारियों को ई-मेल भेजकर तुरंत अमेरिका लौटने का निर्देश दिया था और अब इसी कड़ी में गूगल ने भी अपने कर्मचारियों को ई-मेल भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि वे जल्द से जल्द अमेरिका वापस लौट आएं। गूगल का यह कदम न केवल उसके कर्मचारियों बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय बन गया है।
जानकारी के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन और वर्क वीज़ा से जुड़े कुछ कड़े फैसले लिए हैं, जिससे अमेरिका के बाहर काम कर रहे कर्मचारियों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। विशेष रूप से H-1B वीज़ा और अन्य वर्क परमिट धारकों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कंपनियों को डर है कि अगर उनके कर्मचारी समय पर अमेरिका नहीं लौट पाए तो उनकी नौकरियां और वीज़ा दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। यही वजह है कि गूगल ने भी बिना देर किए अपने कर्मचारियों को मेल भेजकर उन्हें वापस आने की चेतावनी दी है।
गूगल के इस कदम का असर दुनियाभर के भारतीय कर्मचारियों पर भी सीधा पड़ेगा, क्योंकि अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर काम करते हैं। भारत से हर साल हजारों की संख्या में इंजीनियर और आईटी प्रोफेशनल्स अमेरिका जाते हैं और गूगल, माइक्रोसॉफ्ट तथा मेटा जैसी कंपनियों में अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में ट्रंप के फैसले ने उनके करियर और भविष्य दोनों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री को भी नुकसान हो सकता है, क्योंकि विदेशी टैलेंट ही वहां की कंपनियों की रीढ़ माने जाते हैं। कई बार यह देखा गया है कि भारत और एशिया के इंजीनियरों की वजह से सिलिकॉन वैली की कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। लेकिन अब जब ट्रंप के फैसले के बाद कर्मचारियों में असुरक्षा का माहौल बन गया है, तो इससे कंपनियों की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है।
कर्मचारियों में यह डर साफ दिखाई दे रहा है कि कहीं अचानक उनका वीज़ा रद्द न कर दिया जाए या फिर उन्हें नौकरी से हाथ न धोना पड़े। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर काफी बहस छिड़ गई है। लोग इसे ट्रंप की सख्त पॉलिसी और विदेशी कर्मचारियों के प्रति असहज रवैये के तौर पर देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट के बाद गूगल का ई-मेल भेजना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में टेक इंडस्ट्री में बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। ट्रंप के इस कदम से विदेशी कर्मचारियों के भविष्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और इसके दूरगामी परिणाम अमेरिका की अर्थव्यवस्था और वैश्विक टेक मार्केट दोनों पर पड़ सकते हैं।



