
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बार उनका निशाना सीधे अफगानिस्तान और वहां का रणनीतिक तौर पर सबसे अहम ठिकाना माने जाने वाला बगराम एयरबेस बना है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर अफगानिस्तान और मौजूदा तालिबानी सरकार ने अमेरिका के हितों का उल्लंघन किया तो नतीजे बेहद खतरनाक होंगे और “फिर काफी बुरा होगा।” यह बयान ऐसे समय पर आया है जब अफगानिस्तान की स्थिति पहले से ही अस्थिर है और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की नजरें वहां बढ़ती आतंकवादी गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।
बगराम एयरबेस अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से मात्र 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और दशकों तक यह अमेरिकी एवं नाटो सेनाओं का सबसे बड़ा सैन्य केंद्र रहा। यहां से ऑपरेशन चलाकर अमेरिका ने तालिबान और अल-कायदा के खिलाफ कई बड़े सैन्य अभियान संचालित किए थे। लेकिन 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद यह एयरबेस पूरी तरह तालिबान के नियंत्रण में आ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस एयरबेस का नियंत्रण केवल अफगानिस्तान ही नहीं बल्कि पूरे मध्य एशिया और दक्षिण एशिया की सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित करता है।
डोनाल्ड ट्रंप पहले भी बाइडेन प्रशासन की अफगान नीति की आलोचना करते रहे हैं। उनका मानना है कि जल्दबाजी में अमेरिकी सेना को वापस बुलाना एक “ऐतिहासिक भूल” थी, जिसने अफगानिस्तान की स्थिति को और खराब कर दिया। अब जब बगराम एयरबेस पर तालिबान का कब्जा है और वहां से आतंकवादी संगठनों के दोबारा उभरने की आशंका जताई जा रही है, तो ट्रंप का यह अल्टीमेटम और भी अहम हो जाता है। उनका बयान माना जा रहा है कि अमेरिका तालिबान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि वह बगराम एयरबेस को किसी भी वैश्विक आतंकी गतिविधि का ठिकाना न बनने दे।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय में ट्रंप का यह बयान केवल अफगानिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन और रूस जैसे देशों के लिए भी अप्रत्यक्ष संदेश है। बगराम एयरबेस की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसका उपयोग मध्य एशिया में चीन की गतिविधियों पर नजर रखने या रूस की दखलअंदाजी को रोकने के लिए किया जा सकता है। यही कारण है कि अमेरिकी राजनीति में यह मुद्दा सिर्फ सुरक्षा रणनीति नहीं बल्कि चुनावी मुद्दा भी बन गया है। ट्रंप की यह सख्त चेतावनी उन्हें अमेरिकी जनता के बीच एक मजबूत और निर्णायक नेता के तौर पर प्रस्तुत करती है।
दूसरी ओर, अफगानिस्तान सरकार और तालिबान इस बयान पर चुप्पी साधे हुए हैं। अब तक अफगान पक्ष की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से दबाव बनाया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र और पड़ोसी देशों के लिए भी यह एक चिंता का विषय है क्योंकि अगर अफगानिस्तान फिर से आतंकी गतिविधियों का केंद्र बना तो इसका असर सीधे भारत, पाकिस्तान, ईरान और मध्य एशियाई देशों की सुरक्षा पर देखने को मिलेगा।
कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप का यह नया अल्टीमेटम अफगानिस्तान को लेकर वैश्विक बहस को फिर से गर्म कर चुका है। बगराम एयरबेस का भविष्य सिर्फ अमेरिका और अफगानिस्तान ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा नीतियों को प्रभावित करेगा। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद रोचक होगा कि ट्रंप का यह बयान केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है या फिर इसके पीछे वास्तव में कोई बड़ा सैन्य कदम उठाने की तैयारी छिपी है।



