
शांति समझौता बेनतीजा रहने के बाद अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थिति के बिगड़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार, कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर भी देखने को मिल सकता है।
शांति समझौता सफल न होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर तनाव बढ़ने की स्थिति बन गई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते मतभेदों के कारण क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति, ऊर्जा कीमतों और वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है। भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं, उन पर महंगाई और व्यापार घाटे के रूप में इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।



