
एआई समिट के दौरान जहां वैश्विक स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य पर चर्चा हुई, वहीं समिट के इतर भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कई देशों के शीर्ष नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। इन बैठकों में मुख्य रूप से व्यापार, तकनीक सहयोग, डिजिटल नवाचार और निवेश को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत न केवल एआई और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है, बल्कि वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से साझा विकास को भी गति देना चाहता है।
सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रमुख प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सेमीकंडक्टर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। भारत की तेज़ी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और मजबूत आईटी आधारभूत संरचना को देखते हुए कई देशों ने भारत के साथ संयुक्त परियोजनाओं में रुचि दिखाई।
वार्ताओं के दौरान मुक्त व्यापार समझौतों, सप्लाई चेन को मजबूत करने और नवाचार आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ाने जैसे विषय भी प्रमुखता से उठे। प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक भरोसेमंद और स्थिर साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उपयोग मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए और एआई के क्षेत्र में नैतिक मानकों को बनाए रखना आवश्यक है।
इन द्विपक्षीय बैठकों को भारत की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक मंच पर बढ़ते प्रभाव के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार और तकनीकी सहयोग पर बढ़ता जोर भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। समिट के इतर हुई ये मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि भारत वैश्विक साझेदारियों के जरिए भविष्य की अर्थव्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।



