
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है। ताज़ा घटनाक्रम में रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय और अन्य सरकारी ठिकानों को निशाना बनाते हुए 805 ड्रोन और 17 मिसाइलें दागीं। इस भीषण हमले में 4 लोगों की मौत हो गई और कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। यूक्रेन ने भी चुप्पी साधे बिना तुरंत जवाबी कार्रवाई की और रूस की एक महत्वपूर्ण गैस पाइपलाइन को उड़ाकर बड़ा झटका दिया।
रूस का भीषण हमला
रूसी सेना ने यह हमला देर रात से लेकर सुबह तक कई चरणों में किया। ड्रोन और मिसाइलों की इतनी बड़ी संख्या ने यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम को चुनौती दी। हालांकि यूक्रेन का दावा है कि उसने दर्जनों ड्रोन और कुछ मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन भारी तबाही को रोकना संभव नहीं हो सका। राजधानी कीव समेत कई शहरों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई और नागरिकों में दहशत फैल गई।
हताहत और नुकसान
यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक इस हमले में अब तक 4 नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। पीएम ऑफिस की इमारत को भी काफी नुकसान हुआ है। कई सरकारी दफ्तरों, आवासीय क्षेत्रों और अस्पतालों को भी हमले का सामना करना पड़ा।
यूक्रेन की जवाबी कार्रवाई
रूस के हमले के तुरंत बाद यूक्रेन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए रूस की एक गैस पाइपलाइन को उड़ा दिया। यह पाइपलाइन रूस की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रूस की अर्थव्यवस्था और उसकी अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को गहरा झटका देगा। यूक्रेनी सेना का कहना है कि यह हमला रूस को चेतावनी है कि वह पीछे हटे, वरना और बड़े नुकसान झेलने होंगे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने इस हमले की निंदा की है और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। अमेरिका ने भी यूक्रेन के समर्थन की पुष्टि करते हुए कहा है कि रूस के ऐसे हमलों से वैश्विक शांति खतरे में है।
युद्ध का बढ़ता खतरा
लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई से यह साफ हो रहा है कि युद्ध किसी भी समय और खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है। रूस जहां अपने दबदबे को बनाए रखने के लिए लगातार हमले कर रहा है, वहीं यूक्रेन अपने अस्तित्व और संप्रभुता की रक्षा के लिए आक्रामक जवाब दे रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह संघर्ष जल्द नहीं रुका, तो यूरोप और पूरी दुनिया को इसका आर्थिक और राजनीतिक खामियाजा उठाना पड़ सकता है।



