
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक काफी अहम रही। तय समय के अनुसार यह मीटिंग लगभग 40 मिनट की होनी थी, लेकिन दोनों नेताओं के बीच गहन चर्चा के कारण यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। इस बैठक में पीएम मोदी ने भारत का स्पष्ट एजेंडा रखा और कहा कि आने वाले वर्षों में भारत का फोकस शांति, स्थिरता, विकास और आपसी सहयोग को मजबूत करने पर रहेगा।
पीएम मोदी ने बैठक में सबसे पहले आतंकवाद और कट्टरपंथ पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आतंकवाद किसी भी देश की आंतरिक समस्या नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र और विश्व के लिए खतरा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी तरह के आतंकवाद को समर्थन या शहादत नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि भारत हमेशा से शांति और सहयोग का पक्षधर रहा है, लेकिन किसी भी चुनौती का सामना करने में पीछे नहीं हटेगा।
बैठक में आर्थिक सहयोग और व्यापारिक संबंधों को लेकर भी अहम बातचीत हुई। पीएम मोदी ने चीन से कहा कि दोनों देशों की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को संतुलित व्यापार की दिशा में काम करना होगा ताकि पारस्परिक लाभ सुनिश्चित हो सके। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि आपसी रिश्तों में भरोसा और पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि यही दीर्घकालिक साझेदारी की नींव होती है।
इस मुलाकात में सीमा विवाद और संवेदनशील मुद्दों पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत-चीन संबंध तभी मजबूत हो सकते हैं जब सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनी रहे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एलएसी (Line of Actual Control) पर शांति किसी भी द्विपक्षीय संबंध की पहली शर्त है।
बैठक के दौरान जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। पीएम मोदी ने ‘ग्रीन ग्रोथ’ और सतत विकास की दिशा में भारत के प्रयासों को साझा किया और चीन समेत अन्य एससीओ देशों को भी इस दिशा में कदम बढ़ाने का आह्वान किया।
कुल मिलाकर, यह मुलाकात भारत और चीन के बीच संवाद की नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है। एससीओ समिट के इस मंच पर पीएम मोदी का एजेंडा साफ तौर पर दर्शाता है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक मुद्दों पर भी नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। इस बैठक से न केवल भारत-चीन रिश्तों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है, बल्कि पूरे एससीओ ग्रुप के लिए भी एक सकारात्मक संदेश गया है कि संवाद और सहयोग ही आगे बढ़ने का रास्ता है।



