
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के नेता सांसद पीपी चौधरी ने हिंदी भाषा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि यह भारत की भावना, पहचान और एकता का प्रतीक है। यह वह सूत्र है जो पूरे देश को उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक जोड़ता है।
चौधरी ने बताया कि हिंदी 60 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाती है और यह वैश्विक स्तर पर समुदायों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अमेरिका के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में भी हिंदी पढ़ाई जाती है, जिससे यह भाषा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी अब वैश्विक संचार की भाषा बन चुकी है। डिजिटल युग में भी हिंदी का प्रभाव बढ़ रहा है और यह भाषा सांस्कृतिक धरोहर के रूप में प्रस्तुत की जा रही है।
इस कार्यक्रम में भारत के संसद सदस्यों के साथ-साथ दुनिया भर से स्थायी प्रतिनिधियों, उप-स्थायी प्रतिनिधियों, राजनयिकों और संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। यह आयोजन हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और उसकी महत्ता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर था।
सांसद पीपी चौधरी के इस संबोधन ने हिंदी भाषा के प्रति सम्मान और गर्व की भावना को और भी प्रगाढ़ किया है। उन्होंने हिंदी को न केवल एक भाषा, बल्कि भारतीय संस्कृति और एकता का प्रतीक बताया, जो देशवासियों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है।
इस प्रकार, हिंदी दिवस समारोह ने हिंदी भाषा की महत्ता को वैश्विक स्तर पर उजागर किया और यह संदेश दिया कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी आत्मा और पहचान का अभिन्न हिस्सा है।



