निया की निगाहें अब एक ऐसी मुलाकात पर टिक गई हैं जो यूक्रेन युद्ध के अंत की संभावनाओं को जन्म दे सकती है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की सहमति देने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ट्रंप इस बात को लेकर खुशी से गदगद नजर आए और उन्होंने इस संभावित बैठक को “शांति के लिए सुनहरा अवसर” बताया।
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच यह आमने-सामने की मीटिंग अगले कुछ सप्ताह में किसी न्यूट्रल देश में हो सकती है, जहां यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के संभावित समाधान पर चर्चा की जाएगी। ट्रंप ने पहले भी कई बार दावा किया है कि अगर वह सत्ता में होते, तो यूक्रेन युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता। उन्होंने यहां तक कहा था कि वे राष्ट्रपति बनते ही “24 घंटे के भीतर” इस युद्ध को खत्म करवा सकते हैं।
पुतिन की तरफ से इस बैठक के लिए हरी झंडी मिलने को ट्रंप समर्थकों ने एक बड़ी राजनयिक सफलता के रूप में देखा है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा,
“मैं पुतिन से मिलकर विश्व शांति के लिए सार्थक संवाद करूंगा। यह युद्ध विनाशकारी है और अब समय आ गया है कि हम शांति के लिए गंभीर कदम उठाएं।”
यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था जब रूस ने यूक्रेन पर सैन्य हमला किया था। तब से अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं। अमेरिका और नाटो देश यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक मदद दे रहे हैं, वहीं रूस इसे “सुरक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई” कहता आया है। इस संघर्ष ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया है।
ट्रंप और पुतिन के बीच पहले भी अच्छे व्यक्तिगत संबंध रहे हैं। अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने कई बार पुतिन की तारीफ की थी और रूस से संबंधों को सामान्य करने की कोशिश की थी। हालांकि, उनके इस रुख को अमेरिका के अंदर आलोचना का सामना भी करना पड़ा था।
अब, जब अमेरिका में चुनावी माहौल गर्म हो रहा है और ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बनने की दौड़ में हैं, यह बैठक उन्हें एक वैश्विक नेता और शांति निर्माता के रूप में पेश करने का बड़ा मौका बन सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक अगर होती है, तो इससे यूक्रेन युद्ध के समाधान की संभावनाएं जरूर बन सकती हैं, लेकिन इसमें कई कूटनीतिक पेच भी हैं। अमेरिका की मौजूदा बाइडन सरकार और नाटो देशों का इस बातचीत पर क्या रुख होगा, यह देखना बाकी है।
फिलहाल, दुनिया उम्मीद कर रही है कि यह पहल केवल राजनीतिक शो नहीं, बल्कि युद्ध समाप्ति की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हो।



