
भारत द्वारा टैरिफ (शुल्क) में बदलाव कर अमेरिका से आने वाले कुछ उत्पादों पर शुल्क लगाने के फैसले के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “अभी तो टैरिफ लगे केवल 8 घंटे हुए हैं, आप आगे देखिए, अभी कई और प्रतिबंध देखने को मिलेंगे।” ट्रंप की यह टिप्पणी वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है और एक बार फिर से भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में तनाव की संभावना जताई जा रही है।
भारत सरकार ने हाल ही में कुछ अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह कदम अमेरिका की ओर से भारतीय निर्यात पर लगाए गए शुल्कों के जवाब में उठाया गया है। भारत का यह रुख अपनी आर्थिक संप्रभुता और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
ट्रंप, जो एक बार फिर 2024 के अमेरिकी चुनावों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली बने हुए हैं, ने इस फैसले को “भारत की मूर्खतापूर्ण व्यापार नीति” कहा और दावा किया कि इससे भारत को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द ही भारत के इस फैसले का जवाब देगा और अगर वह राष्ट्रपति होते तो भारत को “इस तरह की छूट” कभी नहीं देते।
हालांकि, भारत सरकार ने अपने रुख को पूर्णत: जायज़ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के अनुरूप बताया है। भारत का कहना है कि वह मुक्त व्यापार का पक्षधर है, लेकिन एकतरफा प्रतिबंधों और अनुचित टैरिफ का समर्थन नहीं करता। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से स्टील, एल्युमिनियम और टेक्सटाइल उत्पादों पर लगाए गए शुल्क के जवाब में ही यह कदम उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान उनके पुराने रवैये का ही हिस्सा है, जहां वे अमेरिका के व्यापार घाटे को लेकर दूसरे देशों पर सख्त रुख अपनाने की वकालत करते रहे हैं। उनकी “America First” नीति के चलते भारत सहित कई देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों में खटास आ चुकी है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की बात करें तो दोनों देश दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं हैं और पिछले कुछ वर्षों में इनका आपसी व्यापार बढ़ा है। लेकिन टैरिफ, वीजा नीति, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और डेटा संरक्षण जैसे मुद्दों पर समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका की वर्तमान सरकार इस मसले पर क्या रुख अपनाती है और क्या दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता से कोई समाधान निकलता है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी बड़े देश के सामने झुकने को तैयार नहीं है।



