योगी आदित्यनाथ ने किया गोमती बुक फेयर का उद्घाटन | किताबें पढ़ने की प्रेरणा | लखनऊ यूनिवर्सिटी

लखनऊ विश्वविद्यालय (LU) में शुरू हुए गोमती बुक फेयर का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस मौके पर उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों को मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर किताबें पढ़ने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि किताबें सिर्फ ज्ञान ही नहीं देतीं बल्कि जीवन को सही दिशा में ले जाने का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। आज की युवा पीढ़ी मोबाइल और इंटरनेट की आभासी दुनिया में खोती जा रही है, जबकि वास्तविक ज्ञान किताबों के पन्नों में छिपा है। इस बुक फेयर का आयोजन 28 सितंबर तक किया जाएगा, जिसमें पाठकों को किताबों पर 10% तक की छूट भी दी जाएगी।
गोमती बुक फेयर का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के महत्व को बढ़ावा देना है। इस मेले में देश-विदेश के नामी प्रकाशक, लेखक और शिक्षाविद शामिल हो रहे हैं। यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए गाइडबुक्स, करियर ओरिएंटेड किताबें, साहित्यिक रचनाएं, धार्मिक ग्रंथ और बच्चों के लिए कहानी-पुस्तकें उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल छात्रों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देते हैं, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक सोच की ओर ले जाते हैं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति ने भी छात्रों को किताबों की ओर आकर्षित होने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि आज के दौर में शिक्षा को डिजिटल माध्यमों ने आसान बना दिया है, लेकिन किताबों से मिलने वाला अनुभव और संतुष्टि अद्वितीय है। किताबें व्यक्ति के चरित्र, विचार और दृष्टिकोण को विकसित करती हैं। यही कारण है कि योगी सरकार शिक्षा और साहित्य को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
मेले में छात्रों के लिए विशेष छूट की व्यवस्था की गई है ताकि वे कम दामों में अधिक किताबें खरीद सकें। इसके अलावा, कई लेखक और विद्वान सेमिनार और चर्चा सत्रों में भाग लेंगे, जहां वे युवाओं को जीवन और समाज से जुड़े प्रेरणादायक संदेश देंगे। योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल आवश्यकता तक ही सीमित करना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक उपयोग से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
गोमती बुक फेयर न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव है, बल्कि यह युवाओं को उनके भविष्य को सही दिशा देने का माध्यम भी बनेगा। पढ़ाई और ज्ञान की परंपरा को मजबूत करने का यह प्रयास निश्चित रूप से आने वाले समय में समाज को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।



