
एक मां ने डॉक्टर से शिकायत की कि उनका बच्चा अक्सर चिड़चिड़ा रहता है और परिवार के अन्य सदस्य, खासकर उसकी नानी, उनकी सलाह नहीं मानतीं। इस पर बाल रोग विशेषज्ञ ने समझाया कि बच्चों के व्यवहार पर पूरे परिवार की दिनचर्या, पालन-पोषण का तरीका और वातावरण गहरा प्रभाव डालता है। यदि बच्चे को अलग-अलग लोगों से अलग-अलग नियम, खाने-पीने की आदतें, सोने का समय या स्क्रीन टाइम मिलता है, तो वह भ्रमित, थका हुआ या चिड़चिड़ा महसूस कर सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे की देखभाल करने वाले सभी लोगों को एक जैसी दिनचर्या और नियमों पर सहमति बनानी चाहिए। पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित खेल, सीमित स्क्रीन टाइम और शांत पारिवारिक माहौल बच्चे के भावनात्मक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। यदि बच्चा लंबे समय तक अत्यधिक चिड़चिड़ा रहे, उसकी भूख, नींद या विकास प्रभावित हो, या व्यवहार में अचानक बड़ा बदलाव दिखे, तो बाल रोग विशेषज्ञ या बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना उचित है। कई बार चिड़चिड़ापन केवल अनुशासन का नहीं, बल्कि किसी स्वास्थ्य या विकास संबंधी समस्या का भी संकेत हो सकता है।



