
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने BRICS नेताओं से कहा कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं, बल्कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत सतत विकास को प्रमुख एजेंडे में रखा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया कई तरह के संकटों से गुजर रही है। महामारी, जलवायु आपदाएं और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं ने यह स्पष्ट किया है कि मौजूदा दौर में कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। ऐसे में BRICS देशों के बीच सहयोग और आपसी क्षमता बढ़ाना जरूरी है।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को विकास की राह में बाधा के तौर पर देखने के बजाय दोनों को साथ लेकर चलने की जरूरत बताई। भारत की ओर से BRICS की 2026 अध्यक्षता के लिए चुना गया थीम भी Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability है, जिसमें विकास, नवाचार और स्थिरता को साथ रखा गया है।
पीएम मोदी ने BRICS देशों के बीच संकटों से निपटने की क्षमता मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए साझा BRICS इंटीग्रेटेड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम और आपदा प्रबंधन से जुड़े डेटा इंटीग्रेशन जैसे प्रयासों का उल्लेख किया। इससे भविष्य में स्वास्थ्य और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े खतरों की पहले पहचान करने में मदद मिल सकती है।
प्रधानमंत्री ने तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही। उन्होंने चेताया कि महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीक का हथियारीकरण वैश्विक विकास और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने ऐसी तकनीकी व्यवस्था की वकालत की जिसमें विकास का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंच सके।
BRICS के दूसरे दिन के सत्र में नवाचार और स्टार्टअप सहयोग को भी प्रमुखता मिली। पीएम मोदी ने BRICS Incubator Network का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे सदस्य देशों के स्टार्टअप और इनक्यूबेटर आपस में जुड़ सकेंगे। इसके अलावा BRICS MSME सहयोग पोर्टल को भी छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए उपयोगी पहल बताया गया।
भारत की BRICS अध्यक्षता का जोर केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। नई दिल्ली में हो रहे सम्मेलन में वैश्विक शासन, पर्यावरण, तकनीक, स्वास्थ्य, व्यापार और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की आवाज को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत भी दोहराई।
BRICS Summit 2026 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी का संदेश साफ रहा कि आर्थिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण को अलग-अलग लक्ष्यों के रूप में नहीं देखा जा सकता। तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में टिकाऊ विकास, तकनीकी सहयोग और संकटों से निपटने की साझा क्षमता ही BRICS देशों को अधिक मजबूत और लचीला बना सकती है।



