
सुभाष चंद्र बोस से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायालय का समय बर्बाद करती हैं और यदि ऐसा जारी रहा, तो याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गंभीर मामलों में ही न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए और बेवजह या आधारहीन याचिकाओं से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है। CJI की इस सख्त टिप्पणी को न्यायालय के समय और संसाधनों के संरक्षण के तौर पर देखा जा रहा है।
इस टिप्पणी के बाद यह संदेश भी गया है कि शीर्ष अदालत में याचिका दायर करने से पहले तथ्यों और कानूनी आधारों की मजबूती बेहद जरूरी है, ताकि न्यायपालिका का समय सार्थक मामलों में लगाया जा सके।



